Breaking News : संसद के बाद अब कृषि बिल को राष्ट्रपति ने दी मंजूरी, विपक्ष की अपील बेअसर

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सरकार के तीनों कृषि विधेयकों पर हस्ताक्षर कर मंजूरी दे दी है. राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद अब ये तीनों कृषि विधेयक एक्ट बन गए हैं. बता दें कि इन विधेयकों को लोकसभा और राज्यसभा में पास किए जाने के बाद सरकार ने राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेजा था. दोनों ही सदनों में विपक्ष ने इन विधेयकों का जमकर विरोध किया था. यहां तक कि दोनों सदन में इन विधेयकों के पास होने के बाद विपक्ष के नेताओं ने राष्ट्रपति से मुलाकात कर इन बिलों को मंजूरी नहीं देने की भी अपील की थी.

बता दें कि कृषि बिलों का विरोध सबसे ज्यादा पंजाब और हरियाणा में हो रहा है. यहां किसान पिछले 20 दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं. पंजाब के सभी जिलों में किसान सड़क और रेल रोको आंदोलन कर रहे हैं. 9 दिन पहले ही हरसिमरत कौर ने मोदी सरकार में मंत्री पद से इस्तीफा दिया था. अकाली दल ने लोकसभा और राज्यसभा में इन बिलों का विरोध किया था.

किसानों को आजादी मिलीः PM मोदी

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज रविवार को सुबह ‘मन की बात’ के दौरान संसद में पास हुए तीन बिलों से किसानों को होने वाले लाभ के बारे में चर्चा की. उन्होंने बताया कि अब किसानों को अपनी उपज को देश में कहीं भी बेचने की आजादी मिली है. प्रधानमंत्री मोदी ने कोरोना काल में भी कृषि क्षेत्र के दमखम दिखाने की सराहना की.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जो जमीन से जितना जुड़ा होता है, वो, बड़े से बड़े तूफानों से भी उतना अडिग रहता है. कोरोना के इस कठिन समय में हमारा कृषि क्षेत्र, हमारा किसान इसका जीवंत उदाहरण है. संकट के इस काल में भी हमारे देश के कृषि क्षेत्र ने फिर अपना दमखम दिखाया है.

प्रधानमंत्री ने कृषि बिलों को लेकर कहा कि फल-सब्जियों के अतिरिक्त किसान अपने खेत में, जो कुछ पैदा कर रहे हैं, धान, गेहूं, सरसों, गन्ना उसको अपनी इच्छा अनुसार जहां ज्यादा दाम मिले, वहीं पर बेचने की आजादी मिल गई है. 3-4 साल पहले ही महाराष्ट्र में फल और सब्जियों को एपीएमसी के दायरे से बाहर किया गया था. इस बदलाव ने महाराष्ट्र के फल और सब्जी उगाने वाले किसानों की स्थिति बदली है.

प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि इन किसानों के अपने फल-सब्जियों को कहीं पर भी, किसी को भी बेचने की ताकत है और ये ताकत ही उनकी इस प्रगति का आधार है.

विपक्षी के आरोपो के बीच केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बार-बार दोहराया कि किसानों से एमएसपी पर फसलों की खरीद पहले की तरह जारी रहेगी और इन विधेयकों में किसानों को एपीएमसी की परिधि के बाहर अपने उत्पाद बेचने को विकल्प दिया गया है, जिससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और किसानों को उनके उत्पादों का लाभकारी दाम मिलेगा.

 

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