कारगिल विजय दिवस की पूर्व संध्या पर इलाज के अभाव में तड़पकर मर गया BSF का जवान, डॉक्टर करते रहे कोरोना रिपोर्ट का इंतेज़ार

Bokaro : कारगिल विजय दिवस 2020 की पूर्व संध्या पर सीमा सुरक्षा बल (BSF) के एक जवान की झारखंड के एक अस्पताल में तड़प-तड़पकर जान चली गयी. कोरोना जांच की रिपोर्ट का इंतजार करते डॉक्टरों ने गंभीर रूप से बीमार इस जवान का इलाज शुरू नहीं किया. मामला बोकारो जिला के बोकारो जेनरल हॉस्पिटल (BGH) का है.

मृत जवान के रिश्तेदार अस्पताल पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं, तो बोकारो के सिविल सर्जन एके पाठक कह रहे हैं कि रिपोर्ट आनी चाहिए थी. धनबाद PMCH में अतिरिक्त भीड़ के चलते जांच रिपोर्ट नहीं मिल पायी है.

बोकारो के रहने वाले बीएसएफ की आठवीं बटालियन के उदय शंकर शर्मा पश्चिम बंगाल में सीटी (जीडी) के पोस्ट पर तैनात थे. कैंप में उनकी तबीयत बिगड़ी, तो साथियों ने परिजनों को इसके बारे में सूचित किया. उदय शंकर के परिजनों ने 22 जुलाई को उन्हें बोकारो जेनरल हॉस्पिटल में भर्ती कराया.

यहां डॉक्टर ने साफ कह दिया कि जब तक कोरोना की जांच रिपोर्ट नहीं आ जायेगी, वे उदय का इलाज शुरू नहीं करेंगे. किसी और वार्ड में शिफ्ट भी नहीं करेंगे. डॉक्टर कोरोना की रिपोर्ट का इंतजार करते रहे और कारगिल विजय दिवस की पूर्व संध्या पर भारत के एक जवान ने इलाज के अभाव में दम तोड़ दिया.

उदय शंकर के परिजनों ने बताया कि 22 जुलाई को अस्पताल में भर्ती कराये जाने के बाद 23 जुलाई, 2020 को उसकी कोरोना जांच के लिए सैंपल लिये गये थे. रिपोर्ट नहीं आयी. इस बीच उदय की हालत बिगड़ती गयी.

परिजनों ने डॉक्टर से लाख मिन्नतें कीं, लेकिन चिकित्सक इस बात पर अड़ा रहा कि जब तक रिपोर्ट नहीं आयेगी, वे इलाज नहीं करेंगे. डॉक्टर की जिद की वजह से बीएसएफ का यह जवान अस्पताल में तड़पता रहा और तड़प-तड़पकर 25 जुलाई को उसकी मौत हो गयी.

परिजनों का आरोप है जवान का इलाज अस्पताल ने किया ही नहीं. जवान के बहनोई महेंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि मृतक जवान का ब्लड प्रेशर और शुगर काफी हाई हो चुका था. चिकित्सकों ने इसका भी संज्ञान नहीं लिया. महेंद्र कुमार ने बताया कि उन्होंने 25 जुलाई को बाहर से किट लाकर शुगर की जांच की. शुगर लेवल काफी बढ़ा हुआ था. उन्होंने कहा कि चिकित्सकों की लापरवाही के कारण ही उदय की मौत हुई है.

वहीं, मृतक की पुत्री स्नेहा कुमारी ने कहा, ‘मेरे पापा को कोरोना का संक्रमण नहीं था. बावजूद इसके हमलोगों ने जांच करायी, लेकिन जांच रिपोर्ट आने में इतनी देर हो गयी कि वह बिना इलाज के ही मर गये. यह बोकारो जेनरल अस्पताल की लापरवाही है.’

परिजनों ने उदय शंकर का अंतिम संस्कार भी कर दिया है. ऐसे में सवाल उठता है कि यदि इस बीएसएफ के जवान की रिपोर्ट पॉजिटिव आयी और कई और लोग उससे संक्रमित हुए, तो इसकी जवाबदेही किसकी होगी. बोकारो के सिविल सर्जन ने भी इस मामले से अपना पल्ला झाड़ लिया है.

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