कोरोना संकट: भूख के अभाव में बेटी की मौत, तब घर पहुंचा सरकारी राशन’

Agra: कोरोना संकट काल में लॉकडाउन अब रोज कमाकर परिवार का भरण पोषण करने वालों पर भारी पड़ने लगा है। ताजा मामला ताजनगरी आगरा का है। यहां एक मजदूरी की बेटी भूख के अभाव में मौत हो गई।दिल को झकझोर देने वाला मामला आगरा जिले में सामने आया है। बरौली अहीर ब्लॉक के नगला विधिचंद में शनिवार को पांच साला बच्ची की मौत हो गई। मृतक बच्ची का परिवार गरीबी में जी रहा है। मां का कहना है कि घर में सात दिनों से खाने के लिए कुछ नहीं था। बेटी बीमार भी थी। उसने कई दिनों से कुछ नहीं खाया था। बच्ची की मौत के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया। प्रशासन ने मृतक के घर 50 किलो आटा, चावल और अन्य राशन सामग्री उपलब्ध कराई है।

पीड़ित की 40 वर्षीय मां शीला देवी (Shila Devi) ने बताया कि वो मजदूरी कर बच्चों का पेट पालती थी। पति सांस रोगी है। इससे वो काम पर नहीं जा पाता। लॉकडाउन (Lockdown) में काम छूट गया। घर में 1 महीने से राशन नहीं था। पड़ोसी की सहायता से 15 दिन गुजार लिए, लेकिन बच्ची को 3 दिन से बुखार आ गया। खाना न मिलने से बच्ची में रक्त की कमी हो गई थी। न दवा के पैसे थे और राशन खरीदने के लिए। बच्ची की माँ का कहना है कि राशन कार्ड नहीं होने से कभी राशन नहीं मिला। टोरंट पावर ने बिजली काट दी। 7 हजार रुपये का बिल जमा नहीं कर सकी। 3 महीने से घर में बिजली नहीं है। गरीबी और भूख से मेरी बेटी सोनिया (Soniya) की मौत हो गई। मृतक

डीएम प्रभु नारायण सिंह (DM Narayan Singh) ने मामले की जांच के लिए तहसीलदार सदर प्रेमपाल सिंह को पीड़ित के घर भेजा। तहसीलदार ने कहा कि बच्ची की निधन डायरिया से हुई। कई दिनों से वो बीमार थी। भूख से निधन नहीं हुई। मृतक के घर 50 किलो आटा, 40 किलो चावल व अन्य राशन सामग्री उपलब्ध कराई है। परिवार का राशन कार्ड भी बनेगा। जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेज दी है। शीला देवी ने बताया कि नोटबंदी के वक्त 4 साल पहले मेरे 8 साल के लड़के की मृत्यु हो चुकी है। परिवार की आर्थिक हालत बहुत खराब है। उन्होंने शासन-प्रशासन से आर्थिक सहायता की गुहार लगाई है।

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