दिल्ली HC ने मोदी सरकार के ‘Make in India’ और ‘आत्मनिर्भर भारत को बताया पाखंड

New Delhi: दिल्ली हाईकोर्ट (High Court) ने गुरुवार को मोदी सरकार परतीखा व्यंग्य कसते हुए मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के नारों को उसका ढोंग करार दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि मोदी सरकार पाखंडी है। वो मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत की बड़ी-बड़ी बातें करती है, लेकिन उनकी कार्रवाई से ऐसा लगता है कि ये सारी बातें एक ढ़ोंग के सिवा कुछ नहीं है। हाईकोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार स्थानीय उद्यमियों को बढ़ावा देने को लेकर ‘पाखंडी’ साबित हुई है। दिल्ली हाईकोर्ट ने यह कटु टिप्पणी विभिन्न क्षेत्रीय हवाई अड्डों पर ग्राउंड हैंडलिंग सर्विस उपलब्ध कराने के लिए निकले टेंडरों में कंपनियों की योग्यता के पैमाने में बदलाव को लेकर की थी।

दिल्ली High Court की बेंच ने मोदी सरकार को एक नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा है। सुनवाई के बीच अदालत ने इस मुद्दे को राजनीतिक नेतृत्व बताया। अदालत के अनुसार, ये बेहद दुख की बात है कि एक तरफ मोदी सरकार Make In India और आत्मनिर्भर भारत की बात कह रही है तो वहीं दूसरी तरफ मोदी सरकार ऐसे टेंडर निकालती है, जो छोटी कंपनियों को क्षेत्रीय हवाईअड्डों पर ग्राउंड हैंडलिंग सर्विस के लिए हिस्सेदारी करने से रोकते हैं।

छोटे कारोबारियों को हटाना चाहते हैं तो …

जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस रजनीश भटनागर की पीठ के केंद्र सरकार के जुमलों पर तंज कसते हुए कहा, अगर आप छोटी कंपनियों को हटाना चाहते हैं तो ऐसा ही कहिए। अपने भाषणों में आप बड़ी-बड़ी बातें करते हैं जैसे आपका राजनीतिक नेतृत्व मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत की बात, स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने की बात लेकिन आपके शब्द, आपके काम से मेल नहीं खाते है जोकि पूरी तरह ढोंगी और पाखंडी है।

बेंच ने कहा, अगर आप (मोदी सरकार) इसी तरह से चलना चाहते हैं तो Make In India जैसे जुमले क्यों देते हैं। एक ओर आप कहते हैं कि इस देश, उस देश से आयात बंद करो और दूसरी तरफ आप छोटे उद्यमियों को आगे बढ़ने नहीं दे रहे हैं। बता दें कि टेंडर में भाग लेने के लिए केंद्र सरकार ने 35 करोड़ रुपये से अधिक की उपलब्धता और शेड्यूल्ड एयरलाइंस के साथ काम करने की योग्यता का पैमाना बनाया गया है। इसका हवाला देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा, आप बड़ी जेब और शायद विदेशी टाइप वाले बड़े खिलाड़ी (Company) को ही अंदर आने देना चाहते हैं।

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