बिहार में बाढ़ का कहर जारी, 14 जिलों के लगभग 56 लाख लोग प्रभावित, देखें तस्वीरें

Patna: बिहार के 14 जिलों में बाढ़ का कहर जारी है। पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण, सीतामढ़ी, शेहर, स्पूल, किशनगंज, दरभंगा, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, सरना, खगड़िया, मधुबनी और सीवान में हजारों गाँवों में पानी भर गया है। प्रभावित इलाकों के लोगों को निकाला जा रहा है। एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की एक टीम काम कर रही है, जबकि 1358 सामुदायिक रसोई का इंतेज़ाम किया गया है जहां पीड़ितों के लिए खाने और पिने इंतेज़ाम है।

Flood havoc in Bihar, about 56 lakh people affected in 14 districts, see photos

Flood havoc in Bihar, about 56 lakh people affected in 14 districts, see photos

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एलान किया है की प्राकृतिक आपदा के शिकार लोगों को राज्य के खजाने पर पहला अधिकार है। बाढ़ से तबाह हुए लोगों के खातों में 6,000 रुपये भेजे गए हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या बाढ़ पीड़ित अब स्थायी समाधान चाहते हैं। दरअसल भारत-नेपाल सीमा जिले में हर साल बाढ़ आती है और सब बर्बाद कर के चला जाता है। बाढ़ से प्रभावित लोगों को अपने जीवन को पटरी पर लाने में बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, जबकि सरकार मसलों के हल की आश्वासन दे कर चैन की नींद सो जाता है।

Flood havoc in Bihar, about 56 lakh people affected in 14 districts, see photos

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बिहार का यह चुनावी साल है, नतीजतन, हर राजनीतिक दल की जोबन पर बाढ़ पीड़ितों का दर्द तो है, लेकिन बाढ़ प्रभावित इलाकों में बाढ़ का कोई स्थायी समाधान नहीं है। विशेषज्ञों के मुताबिक, राजनीतिक दल अतीत में बाढ़ का राजनीतिकरण करते रहे हैं और अभी भी उनका राजनीतिकरण कर रहे हैं, जबकि लोगों को बाढ़ समस्या के स्थायी समाधान की ज़रूरत है। बाढ़ के कारण सैकड़ों गांवों की सड़कें टूट चुकी है, शैक्षणिक संस्थान और अस्पताल खराब हालत में हैं, खेती बर्बाद हो गई है और रोजगार नहीं है। लोग मदद की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या सरकार उन लोगों को जिंदगी दे सकती है जिन्होंने सब कुछ खो दिया है। शायद नहीं, यही वजह है कि बाढ़ पीड़ित इस समस्या के स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।

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