भारत में कब तक आएगी Corona की पहली वैक्सीन? देखिए रेस में कौन-कौन सी देसी कंपनियां

Corona Vaccine in India : रूस ने कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने का दावा किया है। इस दावे पर खुद राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी मुहर लगा दी है। उन्होंने इस बात की जानकारी देते हुए बताया कि स्वास्थ्य मंत्री ने कोरोना वैक्सीन की मंजूरी दे दी है। पुतिन के इस ऐलान के बाद जहां दुनियाभर में वैक्सीन को लेकर खुशी की लहर है, वहीं कई स्वास्थ्य संस्थान वैक्सीन के प्रभावकारी और इसके सुरक्षित होने पर भी सवाल उठा रहे हैं। भारत में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) के निदेशक और कोरोना टास्क फोर्स के प्रमुख डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने साफ कहा है कि रूस की वैक्सीन के इस्तेमाल से पहले इसकी सुरक्षा को परखना जरूरी होगा। उन्होंने कहा कि अभी कई ऐसी चीजें हैं, जिसके बारे में जानकारी साफ होनी है।

अमेरिका, चीन के अलावा भारत में भी वैक्सीन जल्द से जल्द बनाने के लिए युद्धस्तर पर तैयारियां चल रही हैं। ऐसे में सवाल ये है हमें और आपको यानी भारत को कोरोना वैक्सीन कब मिलेगी? क्योंकि, हमारे देश में करोना संक्रमण के केस लगातार बढ़ रहे हैं। हर रोज 60,000 से अधिक मामले सामने आ रहे हैं। ऐसे में भारत को वैक्सीन की सख्त जरूरत है। लेकिन, राहत की बात ये है कि दुनिया में जो 2 वैक्सीन तेज़ी से विकसित हो रही हैं, वो भारत को जल्द मिलेंगी।
अगर सबकुछ ठीक रहा तो भारत में भी जल्द कोरोना वैक्सीन का इंतजार खत्म हो सकता है। देश में कई स्तर पर कोरोना वैक्सीन पर काम चल रहा है। कई जगहों पर इस वैक्सीन का ह्यूमन ट्रायल भी चल रहा है। कम से कम तीन भारतीय दवा कंपनी- भारत बायोटेक, जायडस कैडिला, और अरविंदो फार्मा कोरोना वायरस संक्रमण की वैक्सीन तैयार करने में जुटी हैं। फिलहाल भारत के लिए राहत की बात ये है कि इस वक्त कोरोना वैक्सीन बनाने की रेस में दो कंपनियां सबसे आगे हैं। एक है भारत बायोटेक और दूसरी जाइडस कैडिला।

जायडस कैडिला

भारतीय दवा बनाने वाली कंपनी जायडस कैडिला ने प्लाज्मिड डीएनए वैक्सीन ‘जायकोवी-डी’ का 6 अगस्त से दूसरे चरण का क्लिनिकल परीक्षण शुरू कर दिया है। जाइडस कैडिला ने डीएनए आधारित वैक्सीन विकसित की है। इसे 3 जुलाई को मानव ट्रायल के लिए अप्रूवल मिल चुका है। वहीं भारत बायोटेक पहले चरण का ट्रायल पूरा करने के बाद दूसरे चरण के ट्रायल की तैयारी में है। यानी भारत को भी वैक्सीन की रेस में सिंतबर-अक्टूबर तक बड़ी राहत मिल सकती है। पहले चरण का क्लिनिकल परीक्षण हानिरहित और सहनीय रहा था। कंपनी ने कहा कि पहले चरण के क्लिनिकल परीक्षण में वैक्सीन की खुराक दिए जाने पर स्वयंसेवी स्वस्थ पाए गए। उन्होंने इस खुराक को अच्छी तरह सहन कर लिया।

भारत बायोटेक

भारत की पहली संभावित कोरोना रोधी वैक्सीन कोवैक्सिन का ह्यूमन क्लीनिकल ट्रायल दिल्ली, पटना, भुवनेश्वर, चंडीगढ़ समेत देश के 12 हिस्सों में चल रहा है। कोवैक्सिन का निर्माण भारत बायोटेक, आईसीएमआर और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ विरोलॉजी (एनआईवी) ने मिलकर किया है। इसकी मैन्युफैक्चरिंग कंपनी के हैदराबाद कारखाने में की जाएगी।

अरविंदो फार्मा

हैदराबाद स्थित भारतीय दवा कंपनी अरविंदों फार्मा भी कोरोना की वैक्सीन पर काम कर रही है। इसके लिए कंपनी को जैव प्रौद्योगिकी विभाग से वित्त पोषण के लिए मंजूरी भी मिल गई है। कंपनी न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन (PCV) विकसित कर रही है। कंपनी ने पहले और दूसरे चरण के अध्ययन को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। तीसरे चरण का क्लीनिकल ट्रायल दिसंबर 2020 तक शुरू होने का अनुमान है। अरविंदो फार्मा ने कहा कि वैक्सीन साल 2021 के अंत तक पेश किया जा सकता है।

इन संभावित वैक्सीनों पर चर्चा के लिए आज सरकार का एक एक्सपर्ट पैनल बैठक करेगा। इसकी अध्यक्षता नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल करेंगे। बैठक में वैक्सीन के उत्पादन और उन्हें लोगों तक पहुंचाने के तरीकों पर चर्चा होगी।

मोदी सरकार का ‘वैक्सीन प्लान’

– सरकार ने 2 कमेटियों का गठन किया है।

– पहली कमेटी देश में बन रही वैक्सीन का काम तेज़ करेगी।

– ये कमेटी विदेशी वैक्सीन के लिए हुए करार पर भी नज़र रखेगी।

– भारत बायोटेक और ज़ाइडस कैडिला की वैक्सीन पर नज़र रख रही है।

– ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका वैक्सीन के ट्रायल की भी निगरानी कर रही है।

– दूसरी कमेटी में स्वास्थ्य, वाणिज्य, विदेश और वित्त मंत्रालय शामिल हैं।

– ये कमेटी बायोटेक्नोलॉजी और वैक्सीन विज्ञान के प्रयोगों को देख रही है।

कोरोना वैक्सीन को लेकर भारत सरकार इस वक्त तीन अलग-अलग सिस्टम पर काम कर रही है। दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने कहा है कि वो कोरोना वैक्सीन की एक खुराक की कीमत करीब 225 रुपये रखेगी। इससे भारत के करीब 10 करोड़ से ज़्यादा लोगों को कम कीमत पर वैक्सीन मिल सकेगी। इसे लेकर लगातार हाई लेवल मीटिंग और विदेश मंत्रालय के लोग विचार विमर्श कर रहे हैं। लेकिन इस वक्त कोरोना को लेकर सबके मन में एक ही सवाल है। वैक्सीन तो कई देश बना रहे हैं, लेकिन लोगों तक ये वैक्सीन कैसे पहुंचेगी और इसमें कितना समय लगेगा ?

आप तक कैसे पहुंचेगी वैक्सीन ?

वैक्सीन की मॉनिटरिंग करने वाली टीमें और उनकी तैयारियों पर नज़र रखने वाली कमेटी के सामने सबसे बड़ी चुनौती ये है कि इसे आम लोगों तक कैसे पहुंचाया जाए ? इसके लिए एक ख़ास तरह की रणनीति बनाई गई है।

– वैक्सीन रखने के लिए विशेष कोल्ड स्टोरेज होते हैं।

– हर वैक्सीन के लिए अलग-अलग कोल्ड स्टोर हो सकते हैं।

– अमेरिका की मॉडर्ना वैक्सीन माइनस 70 डिग्री सेल्सियस पर रखी जाएगी।

– जबकि ऑक्सफोर्ड और भारत बायोटेक की वैक्सीन के साथ ऐसा नहीं है।

– वैक्सीन के लिए कई देशों के गठबंधन और WHO में को-ऑर्डिनेशन होगा।

– जो देश वैक्सीन बनाएगा, वो WHO के ज़रिये दूसरे देशों को भेजेगा।

– वैक्सीन के लिए बने गठबंधन में शामिल भारत को इसका लाभ मिलेगा।

– भारत की 20% आबादी के लिए ज़रूरी कोरोना वैक्सीन दी जाएगी।

– यानी सबसे ज़्यादा ज़रूरत वाले 20% लोगों को फौरन टीका मिल सकेगा।

– वैक्सीन की ख़रीद, वितरण और टीकाकरण के लिए पूरा प्लान तैयार होगा।

-कमेटियां कम से कम 9 वैक्सीन के विकास पर नज़र बनाए हुए हैं।

भारत में कम और मध्यम आय वाले लोगों के लिए 10 करोड़ कोरोना वैक्सीन तैयार की जाएगी। इसके लिए दुनिया की कई बड़ी कंपनियां भी मदद कर रही हैं। ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका और नोवावैक्स समेत कोरोना वैक्सीन की एक खुराक की कीमत करीब तीन डॉलर होगी। कोवैक्स एडवांस मार्केट कमिटमेंट यानी वैक्सीन को लेकर किए गए गठबंधन को लेकर दुनिया के 92 देशों को ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन उपलब्ध कराई जाएगी।

रूस की वैक्सीन को लेकर ज्यादा सावधान रहने की जरूरतः डॉक्टर

दुनियाभर में कोरोनावायरस के केस अब 2 करोड़ का आकंड़ा पार कर चुके हैं। भारत में भी अब तक 23 लाख से ज्यादा संक्रमित मिले हैं। इस बीच रूस के वैक्सीन का ऐलान करने से कुछ राहत मिली है। लेकिन ज्यादातर देशों में इस वैक्सीन की सफलता को लेकर शक जाहिर किया जा रहा है। भारत में भी इसे लेकर चीजें अभी साफ नहीं हैं। एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया के बाद मुंबई के डॉक्टरों ने भी रूसी वैक्सीन के प्रति सावधान रहने की बात कही। जसलोक हॉस्पिटल के डॉक्टर ओम श्रीवास्तव के मुताबिक, दुनिया में पहले वैक्सीन 3 से 5 साल में तैयार होती थीं। इनमें कई चरण पर ट्रायल होते थे। कोरोना के समय में उन चरणों को पहले ही हटा दिया गया है। ऐसे में इस बात का भी चांस है कि जल्दबाजी में कुछ अन्य जरूरतों का ध्यान न रखा जाए। इसलिए नई वैक्सीन के प्रभावों पर सावधानी बरतनी जरूरी है।

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