भारत-चीन सिमा विवाद: दुश्मनों पर नजर रखने के लिए इजरायल से खरीद रहा AWACS, खर्च होंगे 200 करोड़ डॉलर

New Delhi: लद्दाख में चीन (China) की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के साथ जारी गतिरोध के दौरान भारत सरकार दो फॉल्कन एयरबॉर्न वॉर्निग एंड कंट्रोल सिस्टम (Phalcon Airborne Warning System) यानी ‘अवाक्स’ देगा। भारत के पास 360 डिग्री पर घूमने वाले रोटोडोम लगे तीन PHALCON AWACS और DRDO निर्मित दो AWACS हैं। वहीं, चीन के पास 28 और पाकिस्तान के पास सात हैं, जो विपरीत हालात में हवाई हमले को कमांड देने के काम करता है। सरकार पूरी प्रक्रिया को लेकर तैयार है। अधिग्रहण का मसौदा पिछले सप्ताह सुरक्षा मामले के कैबिनेट कमेटी के समक्ष रखा गया। यह दूसरी बार है जब यह सीसीएस तक पहुंचा है। पिछली बार, सीसीएस ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को प्रस्ताव वापस भेजा और कुछ स्पष्टीकरण मांगे थे। PHALCON रडार की कीमत तकरीबन 100 करोड़ डॉलर है। वहीं, इसके प्लेटफार्म की भी कीमत 100 करोड़ डॉलर है। रडार और प्लेटफॉर्म को इज़राइल में तैयार किया जाएगा। फुल सिस्टम के भारत आने में तकरीबन दो से तीन साल लगेंगे।

आप को बता दें कि पहले भी इस डील की दामों को लेकर भारत और इजरायल के बीच कई दौर की वार्ता हो चुकी है. अब चूंकि बातचीत आखरी दौर में चल रही है तो कैबिनेट की कमेटी ऑन सिक्योरिटी के मंजूरी का इंतजार है, कैबिनेट कमेटी की मंजूरी मिलने के बाद इजरायल के साथ भारत यह डील फाइनल कर देगा. बताया गया कि भारत का इजरायल के फॉल्कन AWACS (एयरबोर्न वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम) को रूस की इल्यूसिन-76 हैवी लिफ्ट एयरक्राफ्ट के ऊपर सेट करने का प्लान है. मीडिया खबर के अनुसार, इस बार जिन दो AWACS को इजरायल से खरीदा जाएगा, वह पहले के तीन फॉल्कन की तुलना में ज्यादा मदद करेंगे. इनसे लंबी दूरी तक कई प्रकार के फ्लाइंग ऑब्जेक्ट्स पर पैनी नजर रखने में मदद मिलेगी.

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