मोदी सरकार ने कहा-हमारे पास लॉकडाउन के दौरान मौत का कोई डाटा नहीं!, मुआवजा कैसे दें, राहुल गांधी ने कही ये बात…

*मोदी सरकार ने कहा-हमारे पास लॉकडाउन के दौरान मौत का कोई डाटा नहीं!, मुआवजा कैसे दें, राहुल गांधी ने कही ये बात…

New Delhi: केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने सोमवार को लोकसभा में बताया है कि प्रवासी मजदूरों की मौत का आंकड़ा हमारे पास है ही नहीं तोऐसे में हम मुआवजा कैसे दे सकते हैं. मुआवजा देने का ऐसे में ‘सवाल नहीं उठता है’. इसपर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र की मोदी सरकार पर जोरदार हमला बोला है. राहुल गांधी ने मोदी सरकार से पूछा कि सरकार ने अगर प्रवासियों के मौत का रिकॉर्ड नहीं रखा तो क्या मौतें नहीं हुईं

दरअसल, कोरोना वायरस को रोकने के लिए 25 मार्च से देशभर में लागू किए गए 68 दिनों के लॉकडाउन में कितने प्रवासी मजदूरों की मौत हुई? इसका आंकड़ा केंद्र सरकार के पास नहीं है.

मंगलवार सुबह ट्वीट कर राहुल गांधी ने सरकार से सवाल किया, ‘मोदी सरकार नहीं जानती कि लॉकडाउन में कितने प्रवासी मज़दूर मरे और कितनी नौकरियां गईं. तुमने ना गिना तो क्या मौत ना हुई? हां मगर दुख है सरकार पे असर ना हुई, उनका मरना देखा ज़माने ने, एक मोदी सरकार है जिसे खबर ना हुई.’

तुमने ना गिना तो क्या मौत ना हुई?
हाँ मगर दुख है सरकार पे असर ना हुई,
उनका मरना देखा ज़माने ने,
एक मोदी सरकार है जिसे ख़बर ना हुई.

कोरोनावायरस के बीच हो रहे पहले संसदीय सत्र में मंत्रालय से पूछा गया था कि क्या सरकार के पास अपने गृहराज्यों में लौटने वाले प्रवासी मजदूरों का कोई आंकड़ा है? विपक्ष ने सवाल में यह भी पूछा था कि क्या सरकार को इस बात की जानकारी है कि इस दौरान कई मजदूरों की जान चली गई थी और क्या उनके बारे में सरकार के पास कोई डिटेल है? साथ ही सवाल यह भी था कि क्या ऐसे परिवारों को आर्थिक सहायता या मुआवजा दिया गया है?

दरअसल, सरकार से पूछा गया था कि कोरोनावायरस लॉकडाउन में अपने परिवारों तक पहुंचने की कोशिश में जान गंवाने वाले प्रवासी मजदूरों के परिवारों को क्या मुआवजा दिया गया है? सरकार के जवाब पर विपक्ष की ओर से खूब आलोचना और हंगामा हुआ. श्रम मंत्रालय ने माना है कि लॉकडाउन के दौरान 1 करोड़ से ज्यादा प्रवासी मजदूर देशभर के कोनों से अपने गृह राज्य पहुंचे हैं.

इसपर केंद्रीय श्रम मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने अपने लिखित जवाब में बताया कि ‘ऐसा कोई आंकड़ा मेंटेन नहीं किया गया है. ऐसे में इसपर कोई सवाल नहीं उठता है.’

तकनीकी जानकारों पर काम करने वाली एक निजी वेबसाइट www.thejeshgn.com ने लॉकडाउन के दौरान उन मौतों का डाटा रिकॉर्ड किया है, जिनकी वजह कोरोना महामारी नहीं बल्कि लॉकडाउन के कारण हुई अव्यवस्था थी। इस रिपोर्ट के मुताबिक 4 जुलाई तक देश भर में कुल 906 मौतें हुईं। इसमें सबसे अधिक 216 आर्थिक तंगी और भूखमरी से, 209 रोड या ट्रेन एक्सीडेंट से और 96 लोग श्रमिक ट्रेनों में मरें। वहीं इस दौरान 133 लोगों ने आत्महत्या की। ये आंकड़े देशभर की मीडिया रिपोर्टस को लेकर तैयार किये गये हैं।

 

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