बिहार में बाढ़ से बर्बादी का दर्दनाक मंजर, प्रभावितों को अब तक नहीं मिला मुआवज़ा

बिहार : गोपालगंज जिले के कई क्षेत्रो में अब जाकर बाढ़ का पानी थमा है, लेकिन बाढ़ से हुई नुक़सानात का मंजर देख गाँववालो को आने वाली जीवन को फिर से बसाने की परेशानी सताने लगी है। बाढ़ से बेघर हुए ऐसे लोग अपने गांव पहुंचकर बर्बादी के मंजर को देख कर आए, लेकिन अभी भी वे गांव में रहने के लिए जाना नहीं चाहते। वे अभी भी सड़कों के किनारे एवं बांध पर अपनी जीवन काट रहे हैं।

सिधवलिया प्रखंड के सकला गंडक नहर पर सकला एवं बुचेया ग्रामीण के 35 – 40 परिजन पनाह लिए हुए हैं। कुछ दिन तो इन्हें गवर्नमेंट की तरफ से खाने का सामान मिला, मगर अब वह भी बंद हो गया। आज भी ये लोग गवर्नमेंट की तरफ से मिले तिरपाल से झोपड़ी बनाकर दिन और रात गुजार रहे हैं।

इनके सामने सैलाब एवं बारिश की दोहरी मार मुश्किल का सबब बनी हुई है। भादो महीने की अंधेरी रात एवं सड़कों पर जिंदगी गुजारना इनके लिए दिक्क्त हो गया है। सकला गांव के राजेंद्र राम कहते हैं कि प्रशासन द्वारा जो तिरपाल दिया गया था, वह भी फट गया है। किसी तरह कपड़ों के सहारे फिर से झोपड़ी बनाकर सिर एवं तन ढंक रहे हैं। वर्षा में तो यह भी सिर एवं शरीर ढकने में असफल हो जा रहे हैं।

इसी गांव की रहने वाली प्रमिला देवी कहती हैं, “गरीबों को देखने वाला कोई नहीं है, बाबू। सबलोग आपना लाभ देखता है। एक माह से हमलोग यहां हैं। गांव में जितना कच्चा घर था, सब बाढ़ के पानी में बह गया है। बाढ़ का जल तो उतर रहा है, मगर अब हमलोग जाएंगे तो कहां जाएंगे? एक अन्य बाढ़ पीड़ित ने कहा, “मैंने खेत में अनाज लगा रखी थी, वो नष्ट हो गई, लेकिन मुआवजा नहीं मिला। कब मिलेगा कोई नहीं जानता।

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