Shiv Sena ने मोदी सरकार पर साधा निशाना, कहा- आर्टिकल 370 और नोटबंदी हटने से भी नहीं बदले कश्मीर के स्थिति

Mumbai: शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में छपे संपादकीय में मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि आर्टिकल 370 हटाने, नोटबंदी करने और जम्मू कश्मीर को दो केंद्रशासित प्रदेशों में बाटने से जम्मू कश्मीर (Jamu-Kashmir) में सुरक्षा हालात में कोई सुधार नहीं हुआ है. भाजपा की सहयोगी रहे शिवसेना ने इस बात पर हैरानी जाहिर किया कि जब केंद्र सरकार में मजबूत’ सरकार है तो नवगठित केंद्रशासित प्रदेश में शांति क्यों नहीं है?

शिवसेना ने कहा कि आर्टिकल 370 हटाए जाने और जम्मू कश्मीर को दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांटने के बावजूद स्थिति पहले जैसी है. शिवसेना ने पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में एक संपादकीय में कहा, हर दिन सड़कों पर खून बह रहा है और बेक़सूर लोगों की जान जा रही है. नोटबंदी के बावजूद आतंकी गतिविधियों और फर्जी नोटों के चलन से कोई राहत नहीं है.’’

जम्मू कश्मीर के सोपोर में हाल में हुई लड़ाई का उधारण देते हुए इसने कहा कि 3 साल का एक बच्चे के अपने दादा के शव पर बैठे होने की फोटो हृदय-विदारक हैं. यह मुठभेड़ तब हुई थी जब आतंकवादियों ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की एक टीम पर हमला कर दिया जिसमें एक जवान शहीद हो गया और एक बुजुर्ग आम नागरिक की मौत हो गई. इस बुजुर्ग के साथ उनका 3 साल का पोता भी था जिसे बाद में जवानो ने गोलीबारी के दौरान सुरक्षित निकाल लिया और उसकी मां के पास पहुंचाया था. छोटा बच्चा भागा नहीं, बल्कि अपने दादा को उठाने की प्रयास कर रहा था.

कुछ केंद्रीय मंत्रियों ने अपने ट्विटर हैंडल पर फोटो ट्वीट की. इन मंत्रियों को समझना चाहिए कि यह फोटो मोदी सरकार की नाकामी साबित कर सकती है. आखिर घाटी में हालात की जिम्मेदारी सरकार की है. बच्चा यह नहीं जानता कि उसके नाना की मौत हो गई है। वह उन्हें जगाने की कोशिश करता है.

ऐसी तस्वीरें केवल सीरिया, मिस्र, सोमालिया और अफगानिस्तान जैसे देशों में ही सामने आई हैं. इसके साथ ही शिवसेना ने कहा कि मोदी सरकार ने पिछले साल अगस्त में जम्मू कश्मीर में आर्टिकल 370 खत्म कर दिया था, लेकिन आतंकी हमलों में जवान लगातार शहीद हो रहे हैं और विस्थापित कश्मीर पंडितों की कोई ‘‘घर वापसी’’ नहीं हो रही है.

शिवसेना ने कहा, पिछले महीने आतंकवादियों ने एक कश्मीरी पंडित सरपंच की हत्या कर दी. संपादकीय में पाकिस्तान (Pakistan) और चीन से लगती सीमाओं पर बढ़ते तनाव को लेकर चिंता जताई गई. संपादकीय में सरकार से कश्मीर में अलगाववादियों और लद्दाख में चीनियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की गई है.

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