बीस लाख रुपए प्रति किलो बिकने वाले इस कीड़े पर पड़ी कोरोना काल की मार

New Delhi : कोरोना महामारी ने लोगों की स्वास्थ्य बिगाड़ने के साथ कई लोगो के काम काज भी छीन लिया। इसका प्रभाव 20 लाख रुपए में बिकने वाली कीड़ाजड़ी पर भी पड़ी है। ये संसार का सबसे महंगा फंगस है। इसे हिमालयन वियाग्रा, कीड़ाजड़ी एवं यारशागुंबा के नाम से भी जाना जाता है। मगर कोवीड-19 मुसीबत के चलते इसका व्यापार ठप हो गया है। अब इसे कोई 1 लाख रुपए किलो की दर से भी खरीदने नहीं आ रहे हैं।

कीड़ाजड़ी स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी है इसलिए विदेशों में इसकी बहुत ज्यादा मांग रहती थी। हिमालयन वियाग्रा एक तरह का जंगली मशरूम है, जो एक विशेष कीड़े के कैटरपिलर्स को मारकर उसके ऊपर जन्मता है। ये ऊंचाई वाले इलाकों में मिलती है। इस जड़ी को सबसे अधिक चीन खरीदता था। मगर देश से उसके तल्ख हुए रिश्तों के चलते इसकी बिक्री पर असर पड़ा है। इसके अतिरिक्त सिंगापुर और हॉगकांग में भी इसकी खास मांग रहती थी। बिजनेसमैन इसे 20 लाख रुपए प्रति किलो तक खरीदते थे। इसी के चलते एशिया में हर वर्ष इसका 150 करोड़ रुपए का व्यापार होता था। मगर लॉकडाउन के कारण ग्राहक देश नहीं आ पा रहे हैं।

बताया जाता है कि कीड़ाजड़ी को May से July माह के बीच पर्वत से निकाला जाता है। क्योंकि उस समय बर्फ पिघलती है। इसको निकालने के लिए गवर्नमेंट की ओर से प्राधिकृत 10-12 हजार स्थानीय गांववाले वहां जाते हैं। 2 महीने इसे इकठ्ठा करने के बाद वे इसे विभिन्न स्थानों पर औषधियों के लिए बेचते हैं। ये शारीरिक पतलेपन, यौन इच्छाशक्ति की कमी, कैंसर आदि बीमारियों को ठीक करने के लिए सबसे अधिक प्रभावकारी साबित होती है।

15 वर्ष में 30 फीसद घटी उपज

इंटरनेशनल प्रकृति संरक्षण संघ के अनुसार कीड़ाजड़ी एक खास तरह की जड़ी-बूटी है। मगर तेजी से घटती इसकी उपज के चलते इसे निरापद किया जाना चाहिए। संघ की ओर से इसकेरेड लिस्ट में डाला है। उनके अनुसार पिछले 15 वर्षों में हिमालयन वियाग्रा की उपलब्धता में 30 फीसद की कमी आई है। इसका सबसे बड़ा वजह ग्लोबल वार्मिंग और क्लाइमेट बदलाव और ज्यादा मांग है। हालांकि कोरोना महामारी में लॉकडाउन के कारण इन्हें खरीददार नहीं मिल रहे हैं। इससे व्यापार प्रभावित हो रहा है।

 

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