Corona New Research :कुंवारे पुरुषों को कोरोना से मौत का खतरा अधिक, शोध में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

दुनियाभर में कोरोना महामारी ने कोहराम मचा रखा है। हर देश में इस वायरस को लेकर हजारों शोध किए जा रहे हैं। अब इस महामारी को लेकर नई रिसर्च सामने आई है। दरअसल, एक स्टडी में पता चला है कि कोरोना की वजह से कुंवारे लोगों में मौत का खतरा ज्यादा होता है, जबकि शादीशुदा लोगों में मरने का खतरा कम पाया गया है।

कुंवारों को क्यों खतरा ज्यादा, 3 पॉइंट से समझें

1. कोरोना से हुई मौत में 20 साल से अधिक उम्र के युवा
रिसर्च करने वाली स्वीडन की स्टॉकहोम यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता स्वेन ड्रेफाल का कहना है, ये सभी फैक्टर कोरोना से मौत का खतरा बढ़ाते हैं। यह रिसर्च स्वीडन के नेशनल बोर्ड ऑफ हेल्थ के आंकड़ों के आधार पर की गई। आंकड़े बताते हैं कि कोरोना से मरने वाले ऐसे पुरुषों की संख्या ज्यादा थी, जिनकी उम्र 20 साल या इससे अधिक थी।

2. पुरुषों में खतरा इसलिए भी ज्यादा
स्वीडन की यह रिसर्च कहती है, महिलाओं के मुकाबले पुरुषों में कोरोना का खतरा दोगुना से भी ज्यादा है। लेकिन शादीशुदा हैं तो खतरा थोड़ा कम है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, जिन महिलाओं और पुरुषों की शादी नहीं हुई है, उन्हें खतरा डेढ़ से दोगुना तक ज्यादा है। इससे पहले आई एक और रिसर्च कहती है, सिंगल और अनमैरिड लोग कई तरह की बीमारियों से जूझते हैं, इस वजह से उनकी मृत्यु दर ज्यादा है।

3. विदेश के मुकाबले स्वीडन में जन्मे लोगों को खतरा ज्यादा
जर्नल नेचर कम्युनिकेशन में प्रकाशित रिसर्च में शोधकर्ता ड्रेफाल ने कहा, विदेश के मुकाबले जो लोग स्वीडन के पैदा हुए हैं, उनमें खतरा ज्यादा है। कोरोना से खतरे का कनेक्शन लोगों की निम्न स्तर की शिक्षा और कम आय वर्ग के लोगों से भी जुड़ा हुआ है। इनमें भी मौत का खतरा ज्यादा है।

वैज्ञानिकों का तर्क है कि महिलाओं के मुकाबले पुरुषों की मृत्यु दर ज्यादा होती है, क्योंकि उनके शरीर की बनावट और लाइफस्टाइल अलग होता है। कम शिक्षित और आय कम होने पर उनकी लाइफस्टाइल और हेल्थ ज्यादा बिगड़ती है। वह अपनी सेहत पर न के बराबर ध्यान देते हैं, इसलिए खतरा बढ़ता है।

बता दें कि दुनियाभर में कोरोना का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। ताजे आंकड़े के मुताबिक लगभग 3 करोड़ 74 लाख से अधिक लोग इस महामारी के चपेट में आ चुके हैं। जबकि 11 लाख के करीब लोगों की मौत हो चुकी है। अभी भी इस वायरस की कोई वैक्सीन पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाई है।

 

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